wahabiyah ka shirkiyah aqeedah Dilbar Hussain Razviवहाबियों का शिर्किया अक़ीदासवाल क्या वहाबी ने अपने गढे धर्म के अनुसार कभी शिर्क किया हैजवाब हां पुरी दुनिया जानती है कि वहाबी अहलेहदीस के नज़दीक( ‏गैरूल्लाह ‎)यानी अल्लाह के सिवा किसी से मदद, ‏वसीला शिर्क है लेकिन वहाबियों का डालडा मिक्स ईमाम इब्ने तैमिया अपनी किताब फतवा शैखु इस्लाम के रिसाला अल अक़ीदतुल वासतिया पृष्ठ ‎12 ‏के लाईन नंबर ‎3 ‏पर लिखता हैﺣﺐ ﺍﻟﺼﺤﺎﺑﺔ ﮐﻠﮭﻢ ﻟﯽ ﻣﺬﮬﺐ ﻭﻣﻮﺩﺓ ﺍﻟﻌﻘﺮﺑﯽ ﺑﮭﺎ ﺍﺗﻮﺳﻞयानी तमाम सहाबा की ममुहब्बत मेरा मज़हब है और रसूल अल्लाह के रिश्तेदारारों ‎(आल, ‏औलाद ‎)की मुहब्बत का वसीला लेता हुं साफ साफ कहता है उनकी आल ‎,औलाद का वसीला लेता हुं क्या समझे वसीला लेने के लिए किसी का हयाते जाहिरी में होना ज़रूरी नहीं वर्ना इब्ने ‎(चिमिया ‎)तैमिया और रसूल अल्लाह के आल व औलाद के दरमियान कई सदियों का फासला ‎(दूरी ‎) ‏है खुलासा हुआ कि वसीला लेना इब्ने तैमिया के नज़दीक हर ऐक से जाएज़ है ‎(चाहे वह दुनियावी हयात से हों या पर्दा कर गए हों ‎) ‏मगर आज के दौर के वहाबी अहलेहदीस नजदी न जाने क्यों अपने ङालङा मिक्स ईमाम इब्ने तैमिया की बात नहीं मानते और काफिर ‎(मुशरिक ‎( ‏भी नहीं मानते बहरे हाल वसीला न लिया तो इब्ने तैमिया मुशरिक और लिया तो वहाबिया अहलेहदीस मुशरिक यह किताब Google play store पर मौजूद हैसर्च करें ‎ﺍﻟﻌﻘﯿﺪﮦ ﺍﻟﻮﺍﺳﻄﯿﮧविडियो के लिए youtube पर official razvi world वहाबियों का शिर्किया अक़ीदास्कैन कापी देखेंलेखक दिलबर हुसैन रज़वी दूरभाष क्रमांक ‎91623971486 ‏मई ‎· ‏Facebook Lite ‎· ‏दोस्त ‎· ‏मोबाइल अपलोड मेंफ़ोटो टैग करें ‎· ‏पूर्ण आकार में देखें ‎·

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